Ujjayi Pranayama क्या है ? और कैसे करे

Ujjayi Pranayama क्या है ? और कैसे करे 

Ujjayi Pranayama in hindi नमस्कार दोस्तों ! आज हमारा वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है। आज हमारे लिए शुद हवा भी नहीं है । परिणामस्वरूप आज हमारे स्वास्थ्य अनेक बीमारियों से घिरा रहता है । इन सभी से बचने ले लिए हम दवाइयों का उपयोग करते है लेकिन उनसे शरीर को ज्यादा नुकसान होता है । इस से अच्छा  है कि रोज योग किया जाये । आज हम जानेगे की उज्जायी प्रणायाम क्या है ? और कैसे किया जाता है साथ ही इस प्रणायाम से होने वाले लाभ भी हम जानेगे।


Ujjayi Pranayama का परिचय :



उज्जायी शब्द का संस्कृत भाषा में मतलब होता है “विजयी” । उज्जायी शब्द का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है “जी” और “उद्”। जहाँ जी का मतलब “जितना” होता है और उद् का अर्थ “बंधन” होता है। इस प्राणायाम के अभ्यास से वायु को जीता जाता है और योग में उज्जायी प्रणायाम की माध्यम से बहुत से गंभीर रोगों से बचा जा सकता है । इस प्राणायाम को अंग्रेजी में “विक्टोरियस ब्रेथ” कहाँ जाता है। इस प्रणायाम को करते समय समुद्र के समान आवाज आती है इसलिए उससे “ओसियन ब्रीथ” के नाम से भी जाना जाता है।


Ujjayi Pranayama करने की विधि :

  • लेटकर करने की विधि
  • खड़े होकर करने की विधि
  • बैठकर करने की विधि
1. लेटकर करने की विधि
  • सबसे पहले समतल और स्वस्थ जगह  जमीन पर चटाई बिछाकर उस पर पद्मासन, सुखासन की अवस्था में बैठ जाए
  • आप अपनी दोनों नासिका छिद्र से सांस को धीरे-धीरे अंदर खींचे। इतना खींचे की हवा फेफड़ों में पूरी तरह से भर जाए।
  • उसके बाद जितनी देर तक हो सके उतनी देर तक वायु को अपने शरीर के अंदर रखें।
  • इसके बाद नाक की दाएं छिद्र को बंद करके बाएं छिद्र से सांस को धीरे-धीरे बाहर निकाल दें
  • इसका अभ्यास कम से कम 10 से 15 मिनट तक करें
2. खड़े होकर करने की विधि
  • इस विधि में सबसे पहले सावधान की अवस्था में खड़े हो जाए।
  • इसके बाद अपनी जीभ को नाली की तरह बनाकर होंठ के बीच मर से हल्का सा मुंह से बाहर निकाले।
  • अब धीरे-धीरे अपनी नासिका से श्वास लें।
  • जितनी देर हो सके श्वास को अपने शरीर के अंदर रखें और इसके बाद श्वास को बाहर निकालते हुए शरीर को हल्का ढीला छोड़े।
  • इस क्रिया को कम से कम 10 से 15 बार तक दोराहे।
  • इस आसन का अभ्यास दिन में एक ही बार करें
3. बैठकर करने की विधि
  • सबसे पहले शांत जगह की तलाश कर उस पर चटाई बिछाकर पद्मासन, सुखासन की अवस्था में बैठ जाए।
  • अब धीरे-धीरे अपने नासिका छिद्र से सांस को धीरे धीरे अंदर खींचे और इतना खींचे कि फेफड़ों में हवा भर जाए।
  • इसके बाद जितनी देर तक हो सके वायु को अंदर रोक कर रखें फिर नाक की दाएं छिद्र से हवा को बाहर निकाल दें

Ujjayi Pranayama करने के लाभ

  • इस आसन को प्रतिदिन करने से मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों को राहत मिलती है
  • थायराइड का मरीज अपनी दवाई लेने के साथ-साथ उज्जाई प्राणायाम करने से जल्दी ठीक हो जाता है
  • इस आसन को प्रतिदिन करने से शरीर का हार्मोन संतुलित रहता है तथा शरीर से टॉक्सिन पदार्थ बाहर निकल जाते हैं
  • शारीरिक तनाव और मानसिक तनाव को इस प्रणायाम से दूर किया जा सकता है ।
  • यह प्रणायाम मन को स्तर रखने में भी मदद करता है।
  • इस प्रणायाम के करने से फेफड़े मजबूत होते है था साँस की प्रति दर भी बढ़ जाती है।
  • इस प्रणायाम को करने से शरीर में रक्त का संचरण भी अच्छा रहता है 

Ujjayi Pranayama करते समय  सावधनी रखे

  • Ujjayi Pranayama करते समय कन्ठ के अंदर खाँसी हो सकती है इस लिए श्वसन क्रिया पर नियंत्रण रखें।
  • Ujjayi Pranayama से बलगम भी निकल सकता है अगर इसमें कोई समस्या हो रही है तो इसे न करे।
  • Ujjayi Pranayama को हमेशा शांत जगह पर करना चाहिए।
  • यह प्रणायाम पहले किसी टीचर की सलाह पर करना चाहिए।

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