मिशन गगनयान 2022 पूरी जानकारी ||Mission Gaganyaan 2020

मिशन गगनयान 2022 पूरी जानकारी ||Mission Gaganyaan 2022

Mission Gaganyaan 2020 – गगनयान मिशन में इसको इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें कम से कम 3 एस्टोनॉट्स आसानी से बैठ सके और अंतरिक्ष में पहुंच सके और 7 दिन की रिसर्च के बाद पुनः पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लैंड कर सके
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गगनयान मिशन 

इसरो chandrayaan-2 को पीछे छोड़ते हुए अब गगनयान मिशन पर जुट गया है दोस्तों हम सभी ने कभी ना कभी आसमान की सैर करने के बारे में  सोचा जरूर होगा लेकिन यह उस समय संभव नहीं था लेकिन आज भारत भी किसी से कम नहीं है अब हमारे देश का नागरिक भी 2022 में अंतरिक्ष की सैर करेगा इस मिशन के तहत तीन एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा इस मिशन का नाम गगनयान मिशन है

गगनयान मिशन क्या है ? :-

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एस्टोनॉट्स

गगनयान इसरो का एक मिशन है जिसके द्वारा भारत के तीन एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में 7 दिन के लिए भेजने वाला है यह मिशन भारतीय मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का हिस्सा है इसका निर्माण इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च संगठन द्वारा किया जाना है इस मिशन को पूरा करने के लिए इसरो बड़े पैमाने पर लगभग 3.7 टन कैप्सूल का निर्माण करने जा रहा है जिसमें तीन एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में जाकर 7 दिन तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जिससे भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा

मिशन गगनयान 2022 पूरी जानकारी ||Mission Gaganyaan 2022

गगनयान मिशन से संबंधित जानकारी :- 

मिशन का नाम = गगनयान मिशन
मिशन लॉन्च की घोषणा = माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा
मिशन लॉन्च होगा = दिसंबर 2021 या 2022 में
मिशन का समय = 7 दिन
मिशन की कुल लागत = 10,000 करोड़ रुपए

गगनयान की संरचना :-

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गगनयान मिशन 

● गगनयान मिशन में इसको इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें कम से कम 3 एस्टोनॉट्स आसानी से बैठ सके और अंतरिक्ष में पहुंच सके और 7 दिन की रिसर्च के बाद पुनः पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लैंड कर सके

● गगनयान को इसरो की जीएसएलवी MK3 लांचर के माध्यम से लांच किया जाएगा इसका निर्माण करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि इसमें एस्ट्रोनॉट को हीट ओर रेडिएशन से कैसे बचाया जाए

● इसरो ने इसकी डिजाइन में पहले से ही कई बिल्डिंग बॉक्स जिसमें रीएंट्री स्पेस कैप्सूल रॉकेट, फेल होने की स्थिति में सुरक्षित को इंजेक्शन मेकैनिज्म, फ्लाइट सूट का सफलतापूर्वक निर्माण और परीक्षण कर लिया गया है

● जिस टेक्नोलॉजी का उपयोग दुनिया का पहला देश अमेरिका ने की थी इसरों भी उसी टेक्नोलॉजी का उपयोग करने वाला है जिसमें अमेरिका ने अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था

● इस मिशन में स्प्लेशडाउन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है जिसमें यह मानव युक्त अंतरिक्ष यान 7 दिन अंतरिक्ष में रह सके और 7 दिन बाद पैराशूट खुले और इसकी सहायता से समुद्र में अच्छी तरह से लैंड कर सके

● इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर किसी कारणवश इस मिशन में टेक्निकल प्रॉब्लम आती है या ऐसे संकेत मिलते हैं तो क्रू मॉडल को वापस पृथ्वी पर लैंड करा दिया जाएगा

गगन मिशन में जाने वाली एस्ट्रोनॉट्स :-

गगनयान मिशन में जाने वाले तीनों एस्ट्रोनॉट को व्योम नाइट्स कहा जाएगा एस्ट्रोनॉट्स का चेन इसरो और भारतीय वायु सेना के द्वारा किया जाएगा सहन करने के बाद इसरो द्वारा उन्हें बेंगलुरु में प्रशिक्षण दिया जाएगा एक रिपोर्ट के अनुसार व्योम नोट्स को विविध गुरुत्वाकर्षण बल एवं अन्य सभी चीजों के बारे में प्रशिक्षण के लिए रसिया भी भेजा जा सकता है

मिशन गगनयान 2022 पूरी जानकारी ||Mission Gaganyaan 2022

गगनयान मिशन की शुरुआत :-

भारत में जब इसरो की स्थापना की गई तभी से उनके द्वारा अंतरिक्ष में इंसान को भेजने की बात की जाती रही हैं, किन्तु यह सफल नहीं हो पा रहा था. फिर सामान्य ऑर्बिटल व्हीकल के तहत साल 2006 में अंतरिक्ष में भारतीय एस्ट्रोनॉट्स भेजने के लिए अध्ययन एवं तकनीकी विकास कार्य शुरू किया गया
इस डिजाईन को मार्च 2008 तक अंतिम रूप देकर भारत सरकार के सामने प्रस्तुत किया गया और फिर अगले साल इस प्रोग्राम के लिए फंडिंग को मंजूरी दी गई  किन्तु फिर राजनीतिक कारणों के कारण इसे 4 सालों के लिए स्थगित कर दिया गया  2014 की शुरूआत में इस प्रोजेक्ट पर फिर से विचार किया गया और फरवरी 2014 में इसके बजट में वृद्धि कर इसे फिर से घोषित कर ‘गगनयान मिशन’ के रूप में शुरू करने की मंजूरी दी गई.
साल 2016 में इसमें कुछ संशोधन किया गया और फिर इसे साल 2017 में भारतीय मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम  शुरू किया गया और इस बार इस पर मोदी सरकार द्वारा पूरी तरह से हरी झण्डी दिखाते हुए 10,000 करोड़ रूपये का बजट निर्धारित किया गया.
मोदी जी ने इस मिशन की घोषणा सन 2018 के स्वतंत्रता दिवस के दिन औपचारिक रूप से अपने भाषण के दौरान की थी.
मई, 2019 में गगनयान की पूरी डिजाइन बना दी गई हैं कि वह किस तरह से कार्य करेगा. हालही में इसरो के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर और ग्लावकास्मोस, जो रशिया स्टेट कारपोरेशन रोस्कोस्मोस की सहायक कंपनी है, ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के चयन, सहायता, चिकित्सा परिक्षण और अंतरिक्ष प्रशिक्षण में सहयोग देने के लिए जुलाई की पहली तारीख को समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. साथ ही कुछ प्रमुख टेक्नोलॉजी के विकास और अंतरिक्ष में जीवन का समर्थन करने के लिए एवं आवश्यक विशेष सुविधाओं की स्थापना के लिए मास्को में एक
इसरो टेक्नोलॉजी लायसन यूनिट की स्थापना करने का निर्णय भी लिया गया है

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